28 July 2008

अगर कहीं मैं तोता होता

अगर कहीं मैं तोता होता
तोता होता तो क्या होता ?
तोता होता।
होता तो फिर ?
होता 'फिर' क्या?
होता क्या?
मैं तोता होता।
तोता तोता तोता तोता
तो तो तो तो ता ता ता ता
बोल पट्ठे सीता राम
(रघुवीर सहाय की एक कविता...एक पहेली)

6 comments:

Udan Tashtari said...

सीता राम!

Advocate Rashmi saurana said...

jai sita ram.

राज भाटिय़ा said...

एक बात पक्की हे फ़िर आप तोती के पीछे जरुर भागते :)

अशोक पाण्डेय said...

वर्षा जी, रघुवीर सहाय की कविताएं मुझे भी पसंद हैं। लेख में अपना बहुमूल्‍य स्‍वर मिलाने के लिए धन्‍यवाद।

Smart Indian said...

कुछ समझ तो नहीं आया मगर मज़ा ज़रूर आया, जैसे सामने वाले को हंसता देखकर हंसी आ जाती है.

ilesh said...

insaan jo he use swikar kar leta...aur jo nahi uske liye ue nahi sochta ki me ye hota to kya hota? to kitne uttar dhundhne se bach jata.....nice sharing