बस्तर के अबूझमाड़ के मुरिया आदिवासी चेंद्रू मंडावी के बारे में जानना, वो भी उनके चले जाने के बाद, ये गर्व और दुख दोनों से भरा है। और आंखें खोलनेवाला भी। सचमुच ये हम सब लोग किन चमचमाती चीजों के पीछे भाग रहे हैं। भाग भी रहे हैं और कहीं पहुंच भी नहीं रहे। सब बीमार है। मोगली, जंगल ब्वॉय और भरत जैसे नामों से जाने गए चेंद्रू मंडावी। इन पर 75 मिनट की स्वीडिश फिल्म बनी, एन डी जंगल सागा, और उसका अंग्रेजी संस्कर- द फ्लूट एंड द एरो। शेर के साथ खेलनेवाला ये लड़का अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक जाना गया। शेर से खेलनेवाले इस साहसी बच्चे से विदेशों से लोग मिलने आते, फोटो खिंचवाते। चेंद्रू मंडावी ने मुफलिसी में पूरी ज़िंदगी गुजार दी। उनकी मौत पर भी हमारे मीडिया में कोई सुगबुगाहट नहीं। अपराधी(जो सिद्ध होने में सालों-साल लग जाते हैं) न्यूज चैनलों पर छाए रहते हैं। उन पर बड़े-बड़े प्रोग्राम बन रहे हैं। ये भी जानना सुखद हैरतभरा था कि फेसबुक पर चेंद्र की बीमारी की खबर पाकर एक जापानी युवती ने मदद के लिए डेढ़ लाख भेजे, जबकि बस्तर के प्रशासन से चेंद्रू मदद मांगते रहे, मगर नहीं मिली। आदिवासी चेंद्र मंडावी को हम शहरियों की श्रद्धांजलि।
यहां गूंजते हैं स्त्रियों की मुक्ति के स्वर, बे-परदा, बे-शरम,जो बनाती है अपनी राह, कंकड़-पत्थर जोड़ जोड़,जो टूटती है तो फिर खुद को समेटती है, जो दिन में भी सपने देखती हैं और रातों को भी बेधड़क सड़कों पर निकल घूमना चाहती हैं, अपना अधिकार मांगती हैं। जो पुकारती है, सब लड़कियों को, कि दोस्तों जियो अपनी तरह, जियो ज़िंदगी की तरह
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06 October 2013
चेंद्रू मंडावी को हम शहरियों की श्रद्धांजलि
बस्तर के अबूझमाड़ के मुरिया आदिवासी चेंद्रू मंडावी के बारे में जानना, वो भी उनके चले जाने के बाद, ये गर्व और दुख दोनों से भरा है। और आंखें खोलनेवाला भी। सचमुच ये हम सब लोग किन चमचमाती चीजों के पीछे भाग रहे हैं। भाग भी रहे हैं और कहीं पहुंच भी नहीं रहे। सब बीमार है। मोगली, जंगल ब्वॉय और भरत जैसे नामों से जाने गए चेंद्रू मंडावी। इन पर 75 मिनट की स्वीडिश फिल्म बनी, एन डी जंगल सागा, और उसका अंग्रेजी संस्कर- द फ्लूट एंड द एरो। शेर के साथ खेलनेवाला ये लड़का अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक जाना गया। शेर से खेलनेवाले इस साहसी बच्चे से विदेशों से लोग मिलने आते, फोटो खिंचवाते। चेंद्रू मंडावी ने मुफलिसी में पूरी ज़िंदगी गुजार दी। उनकी मौत पर भी हमारे मीडिया में कोई सुगबुगाहट नहीं। अपराधी(जो सिद्ध होने में सालों-साल लग जाते हैं) न्यूज चैनलों पर छाए रहते हैं। उन पर बड़े-बड़े प्रोग्राम बन रहे हैं। ये भी जानना सुखद हैरतभरा था कि फेसबुक पर चेंद्र की बीमारी की खबर पाकर एक जापानी युवती ने मदद के लिए डेढ़ लाख भेजे, जबकि बस्तर के प्रशासन से चेंद्रू मदद मांगते रहे, मगर नहीं मिली। आदिवासी चेंद्र मंडावी को हम शहरियों की श्रद्धांजलि।
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