06 October 2013

चेंद्रू मंडावी को हम शहरियों की श्रद्धांजलि




बस्तर के अबूझमाड़ के मुरिया आदिवासी चेंद्रू मंडावी के बारे में जानना, वो भी उनके चले जाने के बाद, ये गर्व और दुख दोनों से भरा है। और आंखें खोलनेवाला भी। सचमुच ये हम सब लोग किन चमचमाती चीजों के पीछे भाग रहे हैं। भाग भी रहे हैं और कहीं पहुंच भी नहीं रहे। सब बीमार है। मोगली, जंगल ब्वॉय और भरत जैसे नामों से जाने गए चेंद्रू मंडावी। इन पर 75 मिनट की स्वीडिश फिल्म बनी, एन डी जंगल सागा, और उसका अंग्रेजी संस्कर- द फ्लूट एंड द एरो। शेर के साथ खेलनेवाला ये लड़का अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक जाना गया। शेर से खेलनेवाले इस साहसी बच्चे से विदेशों से लोग मिलने आते, फोटो खिंचवाते। चेंद्रू मंडावी ने मुफलिसी में पूरी ज़िंदगी गुजार दी। उनकी मौत पर भी हमारे मीडिया में कोई सुगबुगाहट नहीं। अपराधी(जो सिद्ध होने में सालों-साल लग जाते हैं) न्यूज चैनलों पर छाए रहते हैं। उन पर बड़े-बड़े प्रोग्राम बन रहे हैं। ये भी जानना सुखद हैरतभरा था कि  फेसबुक पर चेंद्र की बीमारी की खबर पाकर एक जापानी युवती ने मदद के लिए डेढ़ लाख भेजे, जबकि बस्तर के प्रशासन से चेंद्रू मदद मांगते रहे, मगर नहीं मिली। आदिवासी चेंद्र मंडावी को हम शहरियों की श्रद्धांजलि।

3 comments:

Darshan jangra said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - सोमवार - 07/10/2013 को
अब देश में न आना तुम गाधी
- हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः31
पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra


मदन मोहन सक्सेना said...

Nice sharing.

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कविता रावत said...

गरीब की कितने पूछ परख होती है इससे साफ़ जाहिर होता है ..भेदभाव की नीति बेहद पीड़ादाई है ...वीर-साहसी चेंद्र मंडावी को विनम्र श्रद्धांजलि।