12 February 2015

प्रेम के विरोध में काला गुलाब

10649932_804802942889354_4930702113180452523_n.jpg (चित्र फेसबुक से साभार)
चलो इस वेलेंटाइन डे पर ढूंढ़ी जाए कोई ऐसी प्रेम कविता जो प्रेमी दिलों  के तड़पते  दिलों का हाल खोल दे।  बताए नफरत फैलानेवालों को कि प्रेम ताकत देता है। ख्वाहिशों का आसमान रंग देता है। प्रेम में एक छोटी कश्ती दरिया के उफान को पार कर जाती है। नहीं-नहीं छोड़ो। इस बार ये सब नहीं।  
लव जेहाद का उन्माद फैलानेवालों की बात तो कतई नहीं। इससे प्रेम का जायका बिगड़ जाता है। तो उन नौजवान लड़के-लड़कियों की बात जो इस दिन बैठने के लिए कोई रेस्तरां, कोई पार्क तलाश रहे होंगे। घरवालों की निगाहों से छिपकर गुलाबी-लाल पोशाक में लड़कियां अपने प्रेमियों के पास पहुंचने को आतुर होंगी। कॉलेज की एक्स्ट्रा क्लास या किसी फ्रेंड का बर्थडे, किताबें लौटाने की बहानेबाज़ियां। और सज-धज कर तैयार प्रेमी जिन्होंने लाल गुलाब का इंतज़ाम पहले से ही कर लिया होगा कि कहीं वेलेनटाइन डे के दिन गुलाब कम न पड़ जाएं। सबसे सुंदर तो इस दिन फ्लोरिस्ट शॉप लगते हैं। प्रेम और फूलों की खुशबू से गुलजार। लाल गुलाब की बहार। पर इस बार इनकी बात भी नहीं करते।
चलो काले गुलाब की बात करते हैं। अच्छा नहीं लगा न। वेलेनटाइन डे के दिन काला गुलाब। क्यों भला।  अखबार के पन्नों में एक-दो कॉलम की खबरें होती हैं, लड़की के चेहरे पर तेज़ाब डाला। हम ऐसी कितनी खबरों से यूं गुजर जाते हैं जैसे कुछ हुआ ही नहीं। वो घटनाएं हमें कुरेदती तो है लेकिन पन्ना पलटा और बात खत्म।  वो लड़कियां  प्रेम के विरोध में काला गुलाब दे रही हैं और अपना कसूर पूछ रही हैं। सड़क पर बेखबर जा रही लड़की जिसने उस शख्स का प्रेम प्रस्ताव ठुकरा दिया, जो तेजाब की बोलत छिपाए उसका इंतज़ार कर रहा है, लड़की यहां से गुजरेगी, वो उस पर तेज़ाब डालेगा और भाग निकलेगा। सिर्फ इसलिए कि उस लड़की ने उसे न कह दिया था। वो प्रेम तो कतई नहीं था। कितनी लड़कियों की ज़िंदगीt, चेहरे और सपने तेजाब के हमले में झुलस रहे हैं। उनमें से कई हिम्मत हार जाती हैं लेकिन कुछ इस हादसे से उबर कर जीती भी हैं। stop acid attack  ऐसी ही लड़कियों की संस्था हैं। जो सोशल मीडिया से लेकर दिल्ली के जंतर मंतर तक अपनी आवाज़ बुलंद कर रही हैं। जो अदालत में इंसाफ की लड़ाई लड़ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद तेजाब की बिक्री अब भी खुलेआम हो रही है।  वो तेजाब फेंकनेवालों पर कठोर सजा की मांग कर रही हैं और पीड़ितों के लिए पुनर्वास।
तेजाब के हमले से बुरी तरह लक्ष्मी अग्रवाल की हिम्मत की जितनी दाद दी जाए कम है। वो इस दर्दनाक घटना से न सिर्फ खुद निकलीं बल्कि कितनी लड़कियों को हौसला दे रही हैं। लक्ष्मी जब 16 साल की थी तो 32 साल के एक व्यक्ति ने उस परे तेजाब डाला था। क्योंकि लक्ष्मी ने उसके शादी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। 8 सालों तक लक्ष्मी अपना चेहरा छिपाती रही। लेकिन बस में गैंगरेप की घटना के बाद लक्ष्मी दुनिया के सामने आई। स्टॉप एसिड अटैक ग्रुप से जुड़ी। अपने साथियों के लिए हौसला बनी। अमेरिका में  मिशेल ओबामा ने लक्ष्मी को इंटरनेशनल वुमन करेज अवार्ड से नवाजा।
क्या आपको हमारी इन दोस्तों का काला गुलाब स्वीकार है। ये लड़कियां कहती हैं कि हमारे लिए तेजाब का एक तालाब बनवा दो हम उसमें छलांग लगाने को तैयार हैं, तुम्हारे इस तेजाबी सच्चे प्यार में पूरी तरह जलने को तैयार हैं, कि फिर शायद तुम्हारा प्यार मुझमें और गहरा और सच्चा होगा, पूछती हैं कि क्या फिर तुम उन्हें अपनाओगे, ये लड़कियां दुआ मांगती हैं कि अगले जनम वो तुम्हारी बेटी बनें और तुम जैसा आशिक उन्हें फिर मिले। क्या सहन कर पाओगे।

दोस्तों हमारी तरफ से तुम्हें ढेरों लाल गुलाब। तुम उन्हें स्वीकार करना। तुम बहुत हिम्मती हो, हम बहुत कमज़ोर। हमें माफ करना। अपने सपनों को जीना। अपने सपनों से प्रेम करना।

3 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

सार्थक प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (14-02-2015) को "आ गया ऋतुराज" (चर्चा अंक-1889) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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पाश्चात्य प्रेमदिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

मन के - मनके said...

मैम सिर झुकाती हूंअ,सभी लक्षिमियों को
कि काशः वे प्यार को दुबारा लिख पाएं.



Vaanbhatt said...

Beauty is skin deep...those who love soul can't hurt anyone...