प्रेम तो कुछ ऐसा है कि पार कर जाते हैं आप
सारी नदियां, सारे पहाड़, महासागर
संगीत के वाद्य यंत्र खुद ही बजने लगते हैं
उजाला और साफ दिखने लगता है
अंधेरा जैसे जगमगाता है
समूची दुनिया ही जैसे कलर करेक्शन के साथ
और ख़ूबसूरत हो जाती है
आंसू भी जब छलकते हैं
तो लगता है कि आंखों से लहू टपकते हैं
प्रिय के हाथ में हाथ
तभी ख़ामोशी भी करती है बात

(पीले गुलाब इसलिए क्योंकि मैंने सपने में अपने पतिदेव को पीला गुलाब दिया, जिसके बारे में बताया तो जनाब ने मज़ाक बना दिया, कहा अगले साल सफेद गुलाब देना, उसके अगले साल सूखी डंडी, लाल गुलाब नहीं थे इसलिए, वैसे वो पीले गुलाब सपने में गजब के पीले थे, सुंदर-मखमली-पारदर्शी, उसके लिए शब्द नहीं ऐसे)
4 comments:
गुलाब का रंग चाहे जो भी हो.. जिंदगी में प्यार का रंग बने रहना चाहिए.. :)
:)
गुलाब किसी भी रंग का हो कांटों की हकीकत जानता है।
स्त्री को नमन एक रचना http://rajey.blogspot.com/ पर
आज मंगलवार 8 मार्च 2011 के
महत्वपूर्ण दिन "अन्त रार्ष्ट्रीय महिला दिवस" के मोके पर देश व दुनिया की समस्त महिला ब्लोगर्स को "सुगना फाऊंडेशन जोधपुर "और "आज का आगरा" की ओर हार्दिक शुभकामनाएँ.. आपका आपना
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