03 January 2012

लापता...बलात्कार...हत्या

लापता हुईं तीन बहनें
छोटी-छोटी,सात-दस-बारह उम्र की
मूंगफली लेने निकली थीं
रास्ते में दुनिया को देख रही थीं
पेड़ों को- फूलों को
और फूलों पर मंडराती
तितलियों को

मूंगफलीवाले से मूंगफली खरीदी
100 ग्राम बस
मूंगफली के दानों के साथ
चख रही थीं
ज़िंदगी को

रास्ते में दिखा रजाईवाला
धुन रहा था रुइयों को
गुड़िया थी तीनों
अभी समझ न सकीं थीं
दुनिया को

उछलकूद रही थीं
इठला-गा रही थीं
चुलबुली आवाज़ में

ग़ुम हो गईं अचानक

कहां गईं तीन लड़कियां
आशंकाओं के बादल घिर आए
मूंगफलीवाला-रजाईवाला
सब शक़ के घेरे में आए
हवा में घुटन भर गई
कुएं का पानी ज़हर हुआ
15 दिन बीते थे
पता चल गया
मार कर यहीं फेंकी गईं थीं
तीनों
लापता..बलात्कार..हत्या

6 टिप्पणियाँ:

Rakesh Kumar said...

ओह! खौफनाक यथार्थ की स्थिति
को मार्मिक और हृदयस्पर्शी रूप से
अभिव्यक्त किया है आपने.

आपको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ.

मेरे ब्लॉग पर आईयेगा,वर्षा जी.

मनोज कुमार said...

यह काव्य सवालों से मुठभेड़ करता है।

Ek ziddi dhun said...

जांच रिपोर्ट-तीनों ने आत्महत्या की थी। या वे इतनी मग्न थी मूंगफली में, धुनुक-धुनुक लय में, चुलबुलेपन में कि कुआं देक नहीं पाईं. गिर गईं। इसमें किसी की कोई खता नहीं है।

मनीष सिंह निराला said...

very nice...!
behtarin likha hai..!
welcome on my blog.

प्रदीप कांत said...

और आत्म हत्या के लिए किसी और को दोष नहीं दिया जा सकता।

आशा जोगळेकर said...

दर्दनाक सच । कब बदलेगा ।